मोहिनी एकादशी व्रत (Mohini Ekadashi) कथा 2025: पापों से मुक्ति दिलाने वाली चमत्कारी कथा और महत्व

मोहिनी एकादशी 2025 व्रत कथा (mohini Ekadashi vrat katha)
व्रत तिथि: 08 मई 2025, गुरुवार
पर्व विशेष: वैशाख शुक्ल एकादशी
पूज्य देवता: भगवान विष्णु (मोहिनी स्वरूप)
मुख्य लाभ: पापों से मुक्ति, पुण्य लाभ, मोक्ष प्राप्ति, जीवन में सुख-शांति
मोहिनी एकादशी व्रत की पौराणिक कथा:
पांडवों के ज्येष्ठ युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा—
“हे जनार्दन! वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में कौन-सी एकादशी होती है? उसकी कथा और विधि क्या है?”
भगवान श्रीकृष्ण बोले—
“हे धर्मराज! त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम ने भी यही प्रश्न अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ से पूछा था। उन्होंने बताया कि वैशाख शुक्ल एकादशी को ‘मोहिनी एकादशी’ कहते हैं, जो सभी व्रतों में श्रेष्ठ और समस्त पापों का नाश करने वाली है।”
कथा का सार (संक्षेप में):
भद्रावती नगरी में धृतिमान नामक चंद्रवंशी राजा राज्य करते थे। वहाँ धनपाल नामक पुण्यात्मा वैश्य रहता था जो समाज सेवा और विष्णुभक्ति में लीन रहता था। उसके पाँच पुत्रों में सबसे छोटा पुत्र धृष्टबुद्धि, पापों में डूबा रहता था। जुआ, मदिरा, वेश्यागमन और दुष्कर्मों में उसका जीवन नष्ट हो रहा था।
पिता ने उसे घर से निकाल दिया। दर-दर की ठोकरें खाता हुआ, एक दिन वह महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम में पहुँचा और उनसे अपनी मुक्ति का उपाय पूछा।
महर्षि कौण्डिन्य बोले—
“हे पुत्र! यदि तुम मोहिनी एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करोगे, तो तुम्हारे जन्म-जन्मांतरों के पाप नष्ट हो जाएंगे।”
धृष्टबुद्धि ने पूरे नियम से मोहिनी एकादशी का व्रत किया और व्रत के प्रभाव से पापमुक्त होकर श्रीविष्णु धाम को प्राप्त हुआ।
व्रत का फल एवं महत्व:
- मोहिनी एकादशी व्रत से मेरु पर्वत के समान भारी पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
- इस दिन व्रत करने और मोहिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ने या सुनने से हजार यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
- गौदान करने से सहस्त्र यज्ञों का फल प्राप्त होता है और पितरों की भी तृप्ति होती है।
निष्कर्ष:
मोहिनी एकादशी न केवल व्रतों में श्रेष्ठ मानी जाती है, बल्कि यह पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का सशक्त माध्यम भी है। इसकी कथा, पूजा विधि और महत्व को श्रद्धापूर्वक समझकर व्रत रखने से जीवन में शुभता, शांति और दिव्यता आती है।
जय श्री हरि विष्णु!
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