दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने का दिव्य उपाय

भारतीय सनातन परंपरा में शुभ योगों और नक्षत्रों का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा ही एक अत्यंत शुभ और फलदायी योग है गुरुपुष्य योग एवं रविपुष्य अमृत योग। मान्यता है कि इन योगों में किए गए सरल से उपाय भी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं और दुर्भाग्य को सौभाग्य में परिवर्तित कर सकते हैं।
उपाय:
गुरुपुष्य या रविपुष्य योग के दिन बरगद के पत्ते पर शुद्ध हल्दी से स्वस्तिक का चिन्ह बनाकर उसे घर में श्रद्धापूर्वक सुरक्षित रखें। ऐसा करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है तथा नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
रविपुष्य अमृत योग का महत्व:
‘शिव पुराण’ के अनुसार पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विशेष विभूति माना गया है। यह नक्षत्र अत्यंत शक्तिशाली और कल्याणकारी है। इसके प्रभाव से बड़े से बड़ा अनिष्टकारी दोष भी समाप्त हो जाता है और जो कार्य निष्फल प्रतीत होते हैं, वे भी अनुकूल परिणाम देने लगते हैं। शास्त्रों में कहा गया है—
“सर्वसिद्धिकरः पुष्यः”,
अर्थात पुष्य नक्षत्र सभी प्रकार की सिद्धि प्रदान करने वाला है।
पुष्य नक्षत्र में किया गया जप, तप, ध्यान, दान, पूजा-पाठ एवं पुण्य कर्म अत्यंत महाफलदायी होता है। इस नक्षत्र में किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों को अक्षय तृप्ति प्राप्त होती है और कर्ता को धन, संतान तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
हालाँकि, शास्त्रों के अनुसार पुष्य नक्षत्र में विवाह एवं विवाह से संबंधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं। अतः इस दिन आध्यात्मिक एवं पुण्य कर्म करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
श्रद्धा और विधि से किया गया यह योग जीवन में निश्चित रूप से शुभ परिवर्तन लाता है।
अस्वीकरण: इस लेख में बताई गई बातें/उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। इस लेख में AI टूल्स का प्रयोग किया गया है। ekaanshastro यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/ दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग कर निर्णय लें। ekaanshastro अंधविश्वास के खिलाफ है।
