Akshay Tritya 2025 अक्षय तृतीया आख्या तीज व्रत की कथा

प्राचीन समय की बात है। एक धर्मदास नामक व्यक्ति था जो अत्यंत धर्मपरायण, विनम्र और दानी स्वभाव का था। यद्यपि वह निर्धन था, परंतु उसमें धर्म और कर्म के प्रति गहरी आस्था थी। परिवार के पालन-पोषण की चिंता सदैव उसे घेरे रहती थी, फिर भी वह पूजा-पाठ और सेवा से कभी विमुख नहीं होता था।
एक दिन किसी साधु ने उसे अक्षय तृतीया व्रत (akshay tritya 2025 vrat) और उसके अक्षय पुण्य के विषय में बताया। धर्मदास ने निश्चय किया कि वह इस शुभ व्रत को विधिपूर्वक करेगा।
🕉️ धर्मदास की श्रद्धा और दान
अक्षय तृतीया के दिन धर्मदास प्रातःकाल उठकर गंगास्नान किया और भगवान श्री विष्णु की पूजा-अर्चना पूरे श्रद्धाभाव से की। इसके पश्चात, अपनी सामर्थ्य से कहीं अधिक सामग्रियां जैसे:
- जल से भरे कलश
- पंखे, जौ, सत्तू
- चावल, नमक, गेहूं
- घी, दही, गुड़
- वस्त्र, सोना आदि
सभी वस्तुएं भगवान के चरणों में अर्पित कीं और ब्राह्मणों को दान कर दीं।
उनकी पत्नी ने, घर की स्थिति को देखते हुए, उन्हें ऐसा करने से रोका। उन्होंने कहा कि हमारा परिवार पहले ही निर्धन है, और यह सब देने से स्थिति और खराब हो जाएगी। साथ ही, धर्मदास वृद्ध थे और कई रोगों से पीड़ित भी थे।
परंतु धर्मदास ने आस्था और श्रद्धा के मार्ग को नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा, “यह पुण्य कार्य है, इसका फल अवश्य मिलेगा।” उन्होंने अपने व्रत और दान को पूरी निष्ठा और समर्पण से पूर्ण किया।
पुनर्जन्म में मिला राजयोग
अपने जीवनकाल में हर वर्ष अक्षय तृतीया पर व्रत और दान करते हुए जब धर्मदास का शरीर छूटा, तो अगले जन्म में उन्होंने राजा कुशावती के रूप में जन्म लिया। उनके जीवन में:
- धन, दौलत की कोई कमी नहीं थी
- यश, वैभव और राजसुख से उनका जीवन संपन्न था
- वे फिर भी दानी, सदाचारी और विनम्र बने रहे
उनके सद्कर्मों और अक्षय तृतीया व्रत के पुण्य के कारण ईश्वर की कृपा सदैव उनके साथ बनी रही।
व्रत कथा का फल
जिन लोगों ने अक्षय तृतीया की यह कथा श्रद्धा से पढ़ी या सुनी, उन्हें:
- धन-संपत्ति,
- वैभव और कीर्ति,
- ईश्वर की कृपा
- तथा सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
इस दिन यदि निस्वार्थ भाव से दान-पुण्य किया जाए और लोभ का त्याग किया जाए, तो जीवन में अक्षय फल की प्राप्ति निश्चित होती है।
“धर्म के मार्ग पर चलकर, ईश्वर में अटल श्रद्धा रखने वालों को कभी दुख नहीं भोगना पड़ता। अक्षय तृतीया का व्रत, उनके जीवन में अक्षय पुण्य और समृद्धि लाता है।”
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