Chandra-grahan 2026: सूतक काल में पालन करने योग्य नियम

Chandra Grahan 2026: सूतक काल के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना परंपरागत रूप से आवश्यक माना गया है। इनका उद्देश्य शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि बनाए रखना होता है।
-
पूजा-पाठ से विराम: सूतक प्रारंभ होते ही भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए। कई स्थानों पर मंदिरों के कपाट भी इस अवधि में बंद रखे जाते हैं।
-
गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानी: गर्भवती स्त्रियों को सूतक काल में घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ग्रहण या सूतक का प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ सकता है।
-
शारीरिक क्रियाओं में संयम: इस समय बाल कटवाना और नाखून काटना वर्जित माना जाता है।
-
भोजन संबंधी नियम: सूतक काल में भोजन करने से परहेज करना उचित समझा जाता है। यदि भोजन को सुरक्षित रखना हो, तो उसमें तुलसी पत्र डालने की परंपरा है, जिससे उसे शुद्ध बनाए रखा जा सके।
-
आध्यात्मिक साधना: इस अवधि में मंत्र जप, भजन, ध्यान तथा इष्ट देव का स्मरण करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है।
इस प्रकार, सूतक काल को आत्मसंयम और आध्यात्मिक चिंतन का समय माना जाता है।
अस्वीकरण: इस लेख में बताई गई बातें/उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। ekaanshastro यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग कर निर्णय लें। ekaanshastro अंधविश्वास के खिलाफ है।
