Maha Shivratri 2026: शिवलिंग पर जल अर्पण का महत्व और नियम

महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2026) का पावन पर्व माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। इस शुभ अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और पूर्ण समर्पण भाव से शिव आराधना कर जीवन में आनंद और मंगल की कामना करें।
हर हर महादेव!
शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए नियमपूर्वक शिवलिंग पर जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। जलधारा भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय है। श्रद्धा और विधि से जल अर्पण करने पर भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
किस दिशा में मुख करके जल चढ़ाएं
शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय उत्तर दिशा की ओर मुख करना चाहिए। उत्तर दिशा को भगवान शिव का बायाँ अंग माना गया है, जो माता पार्वती को समर्पित है। इस दिशा में जल चढ़ाने से शिव-पार्वती दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
किस पात्र से जल अर्पित करें
जल अर्पित करने के लिए तांबे, चांदी या कांसे का पात्र श्रेष्ठ माना गया है। स्टील के पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। तांबे का पात्र सर्वोत्तम माना जाता है। ध्यान रखें कि तांबे के पात्र से दूध अर्पित न करें, क्योंकि तांबे में दूध विष के समान हो जाता है।
धीरे-धीरे जल अर्पित करें
भगवान शिव को जल की धारा प्रिय है, इसलिए जल अर्पित करते समय पतली और निरंतर धारा बनाते हुए शांत भाव से चढ़ाना चाहिए। तेजी से जल चढ़ाना उचित नहीं माना गया है।
बैठकर जल अर्पित करें
शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय बैठकर ही पूजा करें। खड़े होकर जल चढ़ाने से छींटे पैरों पर पड़ सकते हैं, जो उचित नहीं माना जाता। रुद्राभिषेक के समय भी बैठकर ही पूजा करनी चाहिए।
जल में अन्य सामग्री न मिलाएं
जल अर्पित करते समय उसमें पुष्प, अक्षत या रोली जैसी सामग्री न मिलाएं। ये वस्तुएं अलग से अर्पित करें। जल को शुद्ध रूप में चढ़ाना चाहिए। चाहें तो गंगा या नर्मदा जैसी पवित्र नदियों का थोड़ा जल मिलाया जा सकता है।
अन्य वस्तुएं अलग से अर्पित करें
यदि भगवान शिव को दूध, दही, शहद या अन्य रस अर्पित करना हो तो उन्हें जल में मिलाकर न चढ़ाएं। पहले वस्तु अलग से अर्पित करें, फिर उसके बाद जल चढ़ाएं।
गाय का दूध उपयोग करें
शिवलिंग पर केवल शुद्ध देसी भारतीय गाय का कच्चा दूध ही अर्पित करना चाहिए। अन्य प्रकार का दूध अर्पित नहीं करना चाहिए।
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