नटराज के पैरों के नीचे कौन दबा रहता है?

भगवान शिव के नटराज स्वरूप में उनके दाहिने पैर के नीचे एक बौना दानव दबा हुआ दिखाई देता है, जिसका नाम अपस्मार (मूयालक) है। अपस्मार अज्ञान, अहंकार, विस्मृति और मिर्गी जैसे रोगों का प्रतीक माना गया है। संस्कृत में मिर्गी को भी “अपस्मार” कहा जाता है।
कथाओं के अनुसार अपस्मार को वरदान प्राप्त था कि वह किसी की भी चेतना हर सकता था। अपने अभिमान और शक्तियों के कारण वह सभी को कष्ट देता था। एक प्रसंग में ऋषियों के अहंकार को शांत करने हेतु भगवान शिव ने नटराज रूप धारण किया। जब अपस्मार ने माता पार्वती को भ्रमित किया, तब शिव ने डमरू का नाद कर उसे निर्बल कर दिया और अपने चरणों तले दबाकर तांडव किया। उन्होंने उसका वध नहीं किया, क्योंकि अपस्मार अज्ञान का प्रतीक है—और अज्ञान के अस्तित्व से ही ज्ञान का महत्व बना रहता है।
नटराज का यह स्वरूप सिखाता है कि मनुष्य अपने भीतर के अज्ञान, अहंकार और दोषों को संतुलन एवं आत्मसंयम से नियंत्रित कर सकता है। भगवान शिव का नटराज रूप बुराई पर विजय, संतुलन, इच्छाशक्ति और आत्मजागृति का प्रतीक है।
जय श्री नटराज
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