जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोई भी माता पिता अपने बच्चे का कभी भी बुरा नहीं चाहते। फिर भी आपस में विचारों के मतभेद के कारण झगड़े या अरगुमेंट्स होते रहते हैं। क्यों होते हैं ऐसे अरगुमेंट्स ? कभी बच्चे अपने माता पिता की बातों को सुनना या समझना नहीं चाहते तो कभी माता पिता अपनी बात अपने बच्चों पर जबरदस्ती थोपने की कोशिश में रहते हैं। असली मुद्दा यही है किसी भी मतभेद या झगड़े का।

ऐसे में माता पिता और बच्चों दोनों को ही कोशिश करनी चाहिए है की समय निकालकर एक दूसरे के साथ बैठे और एक दूसरे की बातों को ध्यान पूर्वक सुनकर समझने की कोशिश करें। ऐसा करने से ना सिर्फ आप एक दूसरे की बातों को सुनकर और समझ कर किसी नतीजे पर पहुंच पाएंगे बल्कि साथ ही साथ इस तरीके से आपके बीच झगड़े भी नहीं होंगे। बहुत ही जरूरी है कि बच्चे अपने माता पिता के जीवन के अनुभवों से कुछ सीखें और साथ ही में माता पिता के लिए भी बहुत जरूरी है कि अपने बच्चों की बातों को सुनें समझें और उन्हें उनकी इच्छा अनुसार कार्य करने की सहमति व अनुमति दें। किंतु माता पिता को इस बात का ध्यान अवश्य रखना होगा कि बच्चे जो भी कार्य करने जा रहे हैं वह किस हद तक सही है या नहीं। यदि नहीं सही है तो उसका सही तरीका अपने बच्चों को सुझाए।

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पैरंट्स और बच्चों के बीच के रिश्तो को कैसे सुधारें

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