जाने शंख के चमत्कारी लाभ और गुणो के बारे में

पौराणिक काल से ही सनातन धर्म में धार्मिक कार्यों में शंख का विशेष महत्व रहा है । पूजा के दौरान शंख का प्रयोग किया जाता है। विष्णु पुराण के अनुसार शंख को लक्ष्मी जी के भ्राता के रूप में बताया गया है। शंख समुन्द्र मंथन के दौरान प्राप्त 14 रत्नों में से एक है। माना जाता है की शंख के अग्र भाग में गंगा जमुना, मध्य भाग में वरुण देव और पिछले भाग में ब्रह्मा जी का वास होता है।
शंख घोष को विजय का प्रतीक माना जाता है। शंख तीन प्रकार के होते है। वामावर्ती शंख, दक्षिणावर्ती शंख और मध्यवर्ती शंख। इनमे सबसे ज्यादा प्रमुख है दक्षिणावर्ती शंख जो कि शुभफलदायक होता है। इसका उपयोग पूजा पाठ इत्यादि में किया जाता है। शंख बजने से व्यक्ति के हृदय की मासपेशियां मजबूत होती है। स्मरण शक्ति बढ़ती है। श्वास सम्बन्धी रोगों से मुक्ति मिलती है। अध्यन कक्ष में शंख रखने से ज्ञान की प्राप्ति होती है।
करोना काल में तो फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए शंख बजाने की सलाह दी जाती है । ऐसा माना जाता है की शंख ध्वनि से रोगाणुओं का नाश होता है। इसलिए जहाँ तक शंख की ध्वनि पहुँचती है वहां तक के रोगाणुओं का नाश हो जाता है। प्रातः और सायंकाल में घर पर शंख बजाने से घर का वातु दोष दूर हो जाता है। घर में शंख बजने से सकारात्मक ऊर्जा आती है।
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