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सनातन धर्म में ज्योतिष अनुसार लोग रत्न धारण करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रत्नों में इतनी शक्ति होती है की वह किसी की भी किस्मत पलट सकते हैं। आपकी बड़ी से बड़ी तकलीफ या समस्या का निवारण इन रत्नो के माध्यम से हो सकता है। रत्नो में इतनी शक्ति होती है की वो किसी भी व्यक्ति के ग्रहों की चाल अनुपूरक बना दे। परन्तु कई बार लोग इन रत्नो को धारण तो कर लेते हैं पर गलत धातु में। जिसके कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

गलत धातु में रत्न धारण करने से इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है तथा साथ ही व्यक्ति के जीवन में विपरीत प्रभाव भी पड़ते है। आज हम आपको बताने जा रहें हैं कि कौन से रत्न को किस धातु में पहनना चाहिए। वैसे भी हर व्यक्ति के लिए अलग रत्न होता है। रत्न धारण करना या न करना व्यक्ति पर निर्भर करता है।

सदेव ध्यान रखें कि कोई भी रत्न अपनी मर्जी से धारण नहीं करना चाहिए। रत्न किसी ज्योतिष की सलाह पर कुंडली और वजन के अनुसार ही धारण करने चाहिए। साथ ही ग़ुस्सा शांत करने के लिए चांदी का छल्ला पहना जाता है।

  1.  मोती को सदेव चांदी में पहना जाता है।
  2. लहसुनिया और गोमेद अष्टधातु में पहनना सर्वोत्तम होता है ।
  3. पुखराज और मूंगा सोने में पहना जाता है।
  4. रूबी को सोने या ताम्बे में पहना जाता है।
  5. ओपल चांदी में धारण करना चाहिए।
  6. अगर नीलम धारण करें तो उसे सोने या प्लैटिनम में पहनना चाहिए।

आशा करते हैं कि उपरोक्त दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी । इसके अलावा रत्न धारण करने से पहले अपने ज्योतिष से सलाह जरूर लें । तथा रत्नो को अभिमंत्रित करने के उपरांत ही धारण करें ।

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नोट: उपरोक्त दी गईं जानकारियाँ, सिफारिशें और सुझाव प्रकृति में सामान्य हैं। यदि आप स्वयं पर इसका प्रयोग करना चाहते हैं तो पहले एक पंजीकृत या प्रमाणित पेशेवर या ट्रेनर से परामर्श जरूर कर लें। उसके उपरान्त ही इस सलाह पर अमल कीजिये।

ज्योतिष: जाने कौन से रत्न को किस धातु में पहनना शुभफलदायक होता है

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